कोडिंग कैसे सीखें

Table of Contents

hello guys aaj ki class me ham sikhne wale h ki कोडिंग कैसे सीखें to start krte h

ham pahle is class ka ek overview dek lete h to ham padne wale h ki

  1. कोडिंग कैसे सीखें
    2.Coding क्या है
    3.Coding सीखने के फायदे
    4.कोडिंग कैसे सीखें – How to Learn Coding in Hindi?
    5.प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है ( What is Programming Language in hindi )
    6.आपको कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्यों सीखना चाहिए?
    7ऑफलाइन प्रोगरामिंग कैसे सीखें?
    .8.प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रकार (Type Of Programming Language In Hindi )
    9.मशीन लेवल लैंग्वेज क्या है? (What Machine Level Language In Hindi)
    10.असेंबली लैंग्वेज क्या है? (What Assembly Language In Hindi)
    11.मशीन लेवल लैंग्वेज और असेंबली लैंग्वेज में अंतर (Machine Level Language and Assembly Language In Hindi)
    12.मशीन लेवल लैंग्वेज और असेंबली लैंग्वेज के बीच मुख्य अंतर (Key Difference Between Machine Level Language and Assembly Language In Hindi)
    13.निम्न स्तर की भाषा के लाभ (Advantages of Low Level Language In Hindi)
    14.उच्च स्तरीय भाषा के प्रकार (Types of High Level Language In Hindi )

Aur bhi bahut kuch … toh class mein end tak bane rhe

to let’s start it

दि आप Coding सीखना चाहते है? लेकिन मालूम नही कि कैसे और कहाँ से सीखें, तो इस class के माध्यम से आप स्टेप-बाइ-स्टेप जानेंगे कि Coding कैसे सीखें?

आप एक वेबसाइट बनाना चाहे या कोई एप्लीकेशन इसके लिये आपको कोडिंग कैसे करते है, ये सीखना होगा। एक बार आप कंप्यूटर कोडिंग सीख गए उसके बाद एक वेबसाइट से लेकर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, मोबाइल गेम्स और कई प्रकार के ऐप्स आसानी से डेवलप कर सकते है।

आगे class में आपको सबसे पहले Coding क्या है और इसे सीखने के फायदे क्या होंगे? इस बारे में बताया गया है। इसके बाद कोडिंग सीखने के लिए किन तरीकों को आपको फॉलो करना चाहिए उन्हें एक-एक करके आप समझ सकते है।

Coding की बेसिक समझ प्राप्त कर लेने के बाद अब मुख्य सवाल पर आते है “Coding कैसे सीखें?” चूंकि यह क्षेत्र बहुत बड़ा है, इसके साथ ही कोडिंग लैंग्वेज भी विभिन्न प्रकार की है। तो एक सवाल बहुत आम है, कि Coding सीखना कैसे स्टार्ट करें?

इसके लिये नीचे स्टेप बाई स्टेप कुछ पॉइंट्स दिए गए है।

  1. खोजें कोडिंग के किस फील्ड में आपकी दिलचस्पी है
  2. सही कंप्यूटर लैंग्वेज और टूल का चुनाव करें
  3. लैंग्वेज के बेसिक कॉन्सेप्ट सीखना शुरू करें
  4. खुदकी वेबसाइट या ऐप बनाए
  5. ऑनलाइन कोर्स और बुक्स से सीखें
  6. गूगल की मदद लें
  7. ऑनलाइन फॉरम जॉइन करें
  8. रोजाना कोड लिखने की प्रैक्टिस करें

यदि आप उन्हें पढ़कर समझेंगे और फॉलो करेंगे तो हमें पूरी उम्मीद है, कि आप जल्द ही एक प्रोफेशनल कोडर बन जाएंगे. Umeed hai ki class appko pasand aaye gi toh chaliye milte h class me.

Coding क्या है

Coding, जिसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भी कहा जाता है, निर्देशों (Instructions) का सेट है, जो कंप्यूटर को बताता है कि उसे क्या करना है। उदाहरण के लिए कंप्यूटर हम इंसानों की लैंग्वेज नही समझते। अब यदि उनसे कोई टास्क करवाना है, तो हमें ऐसी लैंग्वेज का उपयोग करना होगा, जिसे वे समझ जाएं।

तो Coding एक प्रकार की लैंग्वेज है, जिसे कंप्यूटर द्वारा हमारे कमांड को समझने और उसके अनुसार प्रोसेस करने के लिए उपयोग किया जाता है। जो व्यक्ति इन कोड (प्रोग्राम) को लिखते है, उन्हें कोडर या प्रोग्रामर कहा जाता है।

Coding सीखने के फायदे

आज के इस युग में जब कंप्यूटर हर क्षेत्र में उपयोग हो रहा है, Coding सीखना एक व्यक्ति के लिये बेहद ही फायदेमंद साबित हो सकता है। नीचे Coding सीखने से होने वाले कुछ प्रमुख फायदों के बारे में बताया गया है:

  • करियर के नजरिये से देखें तो Coding सीखना बेहतर साबित हो सकता है। चूंकि कोडिंग एक ऐसी स्किल है, जिसकी अभी के समय सबसे अधिक डिमांड है।
  • एक कोडर/कंप्यूटर प्रोग्रामर के पास न सिर्फ जॉब के सुनहरे अवसर मौजूद होते है, बल्कि वे अपनी स्किल्स के कारण बहुत अच्छा पैसा भी कमाते है।
  • आप अपनी खुद की वेबसाइट, ऐप और वीडियो गेम बना सकते है। इसके अलावा आप दूसरे के लिये भी ये काम कर सकते है, और उससे पैसा कमा सकते है।
  • Coding सीखने से आप समझ पाते है, कि टेक्नोलॉजी असल मे काम कैसे करती है। इससे आप अपने जीवन मे टेक्नोलॉजी का और बेहतर तरिके से उपयोग कर पाते है।
  • चूंकि Coding के लिये लॉजिकल थिंकिंग की आवश्यकता होती है, आपको कंप्यूटर में स्टेप बाई स्टेप कमांड को फीड करना होता है। ऐसा करने से एक व्यक्ति की किसी समस्या को हल करने की क्षमता में भी धीरे-धीरे सुधार होता है।

कोडिंग कैसे सीखें – How to Learn Coding in Hindi?

स्टेप 1: खोजें कोडिंग के किस फील्ड में आपकी दिलचस्पी है

यदि आपकी Coding सीखने में काफी रूचि है, तो सबसे पहले इसके बारे में थोड़ा जानकारी ले और देखें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के किस फील्ड में आपकी ज्यादा दिलचस्पी है। उदाहरण के लिये अगर आप एक वेबसाइट बनाना चाहते है, तो वेब डेवलपमेंट (Web Development) के क्षेत्र में अपना करियर शुरू कर सकते है। इसके अलावा ऐप डेवलपमेंट (App Development), वीडियो गेम डेवलपमेंट (Video Game Development), सिस्टम डेवलपमेंट (System Development), एम्बेडेड सिस्टम डेवलपमेंट (Embedded Systems Development), और भी बहुत सारे फील्ड है, जिसके बारे में जानकारी लेकर आप सही दिशा में आगे बढ़ सकते है।

जिस फील्ड का आप चयन करेंगे वो काफी हद तक तय करेगा कि आपको कौन सी लैंग्वेज सीखनी चाहिए। इसके अलावा अपने पसंद के फील्ड में काम करने से आपको कोड लिखने और नई-नई चीजें सीखने में भी मजा आएगा। आपके पास एक स्पष्ट रास्ता होगा जिस पर चलकर आप Coding के उस फील्ड में मास्टर कर पायेंगे और अपनी स्किल के दम पर अच्छा पैसा भी कमा सकेंगे।

स्टेप 2: सही कंप्यूटर लैंग्वेज और टूल का चुनाव करें

एक बार अपना फील्ड चुन लेने के बाद यह काफी हद तक पक्का हो जाता है, कि आपको कौनसी कंप्यूटर लैंग्वेज सीखनी चाहिए। उदाहरण के लिये अगर आप वेब डेवलपमेंट को चुनते है, तो आमतौर पर आपको HTML, CSS और JavaScript जैसी लैंग्वेज सीखनी होती है। मोबाइल ऐप डेवलपमेंट में Java, C#, Python और Swift जैसी लैंग्वेज के साथ आप शुरुआत कर सकते है। ऐसे ही अन्य फील्ड के हिसाब से आपको सही लैंग्वेज और टूल का चुनाव करना है, जिसकी मदद से आप कोड लिखने की प्रैक्टिस करेंगे।

यह बेहद ही महत्वपूर्ण स्टेप है। इसके लिए आप यूट्यूब पर वीडियो देख सकते है, गूगल पर आर्टिकल पढ़ सकते है, किसी प्रोग्रामर की राय ले सकते है। जिस भी तरीके का आप उपयोग करना चाहे, करें। एक सही लैंग्वेज से शुरुवात करना आपके Coding सीखने के इस सफर को और बेहतर बना सकता है। नीचे दिए चार्ट की मदद से आपको अपने फील्ड के हिसाब से सही लैंग्वेज चुनने में मदद मिलेगी।

Web DevelopmentJavaScript/HTML/CSS, nodejs, php, django
AndroidJAVA, Kotlin
iOSSwift
Software DevelopmentJava, C#, Python
Game DevelopmentC, C++, C#

स्टेप 3: लैंग्वेज के बेसिक कॉन्सेप्ट सीखना शुरू करें

अब आपको चुनी गई लैंग्वेज के बेसिक कॉन्सेप्ट को सीखना शुरू करना है। उदाहरण के लिये मान लेते है, आपने C++ लैंग्वेज को चुना, तो आप उसके बेसिक फंडामेंटल्स (Syntax, Data Types, Variables, Functions, Loops, Arrays or Lists, etc.) को सीखिए। इसके लिए आप इंटरनेट की मदद ले सकते है। वेबसाइट जैसे ― Codecademy, W3Schools, SoloLearn, HackerRank, GeeksforGeeks, freeCodeCamp, etc. आपको फ्री में Coding के बेसिक्स सीखाने में मदद करते है। इसके साथ ही आप वीडियो ट्यूटोरियल की मदद भी ले सकते है। कुछ प्रमुख यूट्यूब चैनल ― CodewithHarry, Apni Kaksha, ProgrammingKnowledge, Telusko, MySirG.Com, etc.

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इन संसाधनों का उपयोग करके आप आसानी से चुनी गई लैंग्वेज को सीखना शुरू कर सकते है। इसके अलावा यदि आपके शहर में Coding के लिए कोई ट्रैनिंग सेंटर हो, तो आप वहां जाकर भी क्लास जॉइन कर सकते है। अगर आप Coding के बारे में कुछ भी नही जानते, तो किसी ट्रैनर के माध्यम से सीखना आपके लिए ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।

स्टेप 4: खुद की वेबसाइट या ऐप बनाएं

अपना खुद का एक प्रोजेक्ट स्टार्ट करें। आप एक वेबसाइट या कोई ऐप बनाना शुरू कर सकते है। जो भी आप सीख रहे है, उसे प्रैक्टिस करने का यह सबसे अच्छा तरीका है। ऐसा करने से आप अपनी गलतियों को पकड़कर उनसे सीख पाएंगे। हालांकि बहुत से स्टूडेंट परेशान रहते है, कि वो कैसे खुदका प्रोजेक्ट स्टार्ट करें। आपको सीधे फेसबुक जैसी वेबसाइट नही बनानी है, बल्कि जो भी आप सीख रहे है, उसके हिसाब से एक सिंपल साइट या एप्लिकेशन बनाना शुरू करना है।

स्टेप 5: ऑनलाइन कोर्स और बुक्स से सीखें

ऑनलाइन बहुत सारे कोर्स और बुक्स मौजूद है, जिन्हें खरीदकर आप Coding सीख सकते है। कोर्स से सीखने का सबसे बड़ा फायदा ये होता है, कि उसमें लैंग्वेज से सम्बंधित सभी ट्यूटोरियल सीरीज में दिए गए होते है। इससे आप भटकते नही है, और उस लैंग्वेज से सम्बंधित सभी टॉपिक आप सीख भी लेते है।

Coursera, Udemy और edX कुछ प्रमुख वेबसाइट है, जहां से आप कोडिंग कोर्स खरीद सकते है। इसके साथ ही Coding सीखने के लिए बुक्स पढ़ना भी एक अच्छा तरीका है। बुक्स के माध्यम से आप लैंग्वेज के फंडामेंटल्स को और गहराई से समझ पाते है। कुल मिलाकर आपको सभी संसाधनों का उपयोग करना चाहिए, ताकि आप तेज गति से इस क्षेत्र में आगे बड़ पाए।

स्टेप 6: गूगल की मदद लें

Coding सीखने के दौरान आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हो सकता है, आपका कोड सही तरह से काम न करें, कोई एरर मैसेज दिखाने लगे। इसके साथ ही Coding में कई ऐसी चींजे होती है, जो पहली बार मे समझ नही आती है। समस्या कोई भी हो, उसे गूगल में सर्च करें आपको उसका समाधान जरूर मिलेगा।

ये बिल्कुल भी मत सोचिएगा कि आपसे कोई गलती नही होगी। बल्कि एक प्रोफेशनल प्रोग्रामर भी कोड लिखने के दौरान कई तरह की गलतियां कर बैठते है। तो जब भी कोड काम न करें और आपको कुछ समझ मे न आये, समस्या को गूगल में सर्च करें। उससे सम्बंधित कई सारे वेब पेज आपको मिल जाएंगे।

स्टेप 7: ऑनलाइन फॉरम जॉइन करें

शुरुआत में खुद से Coding सीखने पर आपको कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ चीजें ऐसी है, जो शायद आपके बिल्कुल भी समझ मे न आये। ऐसे में किसी Coding Forum को जॉइन करके आप अपने सवालों को वहां छोड़ सकते है। ये फॉरम दुनियाभर के प्रोग्रामरों के लिए एक ऑनलाइन समुदाय की तरह होते है, जहां वे एक-दूसरे के सवालों के जवाब देते और अपनी नॉलेज को अन्य लोगों के साथ शेयर करते है।

कुछ प्रमुख ऑनलाइन फॉरम जिसमें StackOverflow, CodeProject, Bytes Community, etc. शामिल है। ऐसे ही कुछ अन्य फॉरम जॉइन करें, जो आपको अपने हिसाब से बेहतर लगें। यह आपकी लैंग्वेज से सम्बंधित सभी परेशानियों को हल करने में मदद करेंगे।

Ummeed h ki class aapko pasand aa rahi hogi to bane rahiye class me our sikte rahiye to jante h

स्टेप 8: रोजाना कोड लिखने की प्रैक्टिस करें

सीखने के साथ-साथ ये और भी जरूरी है, कि आप रोजाना कोड लिखने की प्रैक्टिस करें। आप जितना भी समय Coding को देते है, उसमें से आधा-आधा समय सीखने और प्रैक्टिस करने के लिए बांट दे। आपने इंग्लिश में एक कहावत “Practice Makes a Man Perfect” तो सुनी ही होगी। ये बात Coding सीखने के मामले में और भी सटीक बैठती है।

अगर आप एक बेहतर कोडर बनना चाहते है, तो आपको रोजाना कोड लिखने की अपनी आदत को विकसित करना होगा। ये बिल्कुल भी जरूरी नही कि आप एक ही दिन में बहुत सारा कोड प्रैक्टिस करें। भले ही दो लाइन कोड की प्रैक्टिस करें, परन्तु करे रोज। रोजाना प्रैक्टिस करने से आपके लिए कोड लिखना आसान होता चला जायेगा।

Programming Language in hindi – अक्सर आप लोगो  के मन में ये बात आयी होगी की जो Application या Software होते है वो कैसे बनते है , हैकिंग कैसे होती है तो ये सब Programming Language की सहायता से बनते है | तो आज के लेख में हम यही जानेंगे की Programming Language क्या है और ये कैसे काम करता है | 

वर्षो से हम बातचीत करने के लिए कई तरह की भाषाओ का इस्तेमाल करते आ रहे है जैसे हिंदी , इंग्लिश आदि | हम अपने दैनिक जीवन में सभी कामो को करने के लिए इन्ही भाषाओ का इस्तेमाल करते है जैसे अगर हम किसी आदमी से कहते है की हमें एक गाना सुनाओ तो वो आदमी हमारी बात समझकर हमें गाना सुनाने लगता है लेकिन अगर हम यही काम कंप्यूटर से कहे तो कंप्यूटर हमारी बात नहीं समझ पायेगा क्योकि कंप्यूटर सिर्फ Binary Language समझता है अर्थात कंप्यूटर सिर्फ Electronic Signal को ही समझ पाता है | तो इसी समस्या को दूर करने के लिए Programming Language बनाया गया |

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है ( What is Programming Language in hindi )

 Programming Language मनुष्य द्वारा बनायीं गयी  एक भाषा है जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर में प्रोग्राम बनाते समय या कंप्यूटर को निर्देश ( Instruction ) देने के लिए किया जाता है | प्रोग्रामिंग भाषा को कंप्यूटर की भाषा कहा जाता है क्योकि कंप्यूटर इन भाषाओ को समझकर हमारे दिए गए निर्देश के अनुसार कार्य करता है | इन्ही प्रोग्रामिंग भाषाओ सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन बनाये जाते है और इन्हे प्रोग्राम कहा जाता है और जो प्रोग्रामिंग करता है उसे प्रोग्रामर कहा जाता है | 

अगर हम आसान भाषा में समझे तो Programming Language एक ऐसा टूल है जिसका इस्तेमाल करके हम Computer को कोई भी Instruction दे सकते है और कंप्यूटर हमारे दिए गए Instruction के अनुसार Program बना देता है | अब हम इस लेख Programming Language in hindi में जानेगे की यह काम कैसे करता है |

Programming Language काम कैसे करता है

हमें कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग करने के लिए एक Software की जरुरत होती है क्योकि इसी के  जरिये हम कंप्यूटर में कोई भी Program बना सकते है | Market में प्रोग्रामिंग करने के लिए ढेर सारे  Software मौजूद है | हर Programming Language के अलग अलग Software होते है | आज के समय में लगभग 2500 Programming Language मौजूद है |  तो अब बात आती है ये भाषाएँ काम  कैसे करती है | 

हमे जब भी कंप्यूटर में कोई Program बनाना होता है तो हम सबसे पहले किसी एक  Programming Language को चुनते है और फिर उस Language के Software को अपने कंप्यूटर में  download करते है | उस Software में एक कम्पाइलर या अनुवादक होता है जो हमारे द्धारा लिखे गए Program या Code को Binary Code में बदल देता है क्योकि कंप्यूटर सिर्फ Binary Language ही समझ पाता है | इसके पश्चात , कंप्यूटर उस Binary Code के अनुसार Program तैयार कर देता है | लेकिन सभी Programming Language में ऐसा नहीं होता है अर्थात वे बिना कम्पाइलर या अनुवादक के ही execute हो जाते है , आगे हम जानेंगे की ऐसा क्यों होता है | 

Programming Language के प्रकार 

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को मुख्यता दो भागो में बाटा गया है जो निम्न है – 

1-Low Level Programming Language 

2-High Level Programming Language

Low Level Programming Language 

इस प्रोग्रामिंग भाषा को कंप्यूटर आसानी से समझ जाता है और इस भाषा में लिखे गए प्रोग्राम  कंप्यूटर में direct execute हो जाते है अर्थात इसमें किसी converter या translator की आवश्यकता नहीं होती है | इसे मशीनी भाषा भी कहा जाता है | इस language में Binary language में प्रोग्रामिंग की जाती है अर्थात इसमें प्रोग्राम 0 , 1 की भाषा में किया जाता है | इस भाषा को कंप्यूटर आसानी से समझ जाता है जबकि इंसानो को यह भाषा जल्दी समझ में नहीं आती है इसलिए इस भाषा को Low Level Language कहा जाता है | 

Low Level Language के भी दो प्रकार होते है –

Machine Language – इस भाषा में लिखे गए सारे निर्देश कंप्यूटर बिना किसी अनुवादक के direct ही execute कर लेता है | ऐसा इसलिए होता है क्योकि कंप्यूटर सिर्फ मशीनी भाषा अर्थात binary language समझता है जो 0 और 1 के format में होता है | इसलिए इस language को binary language कहा जाता है | 

जैसे अगर आप 10 लिखते है तो इसका binary number 1010 होगा और a लिखते है तो 01100001 00100000 होगा | हम कंप्यूटर में जो भी type करते है तो वो पहले binary में convert होता है लेकिन अगर हम binary type में करे तो कंप्यूटर बिना किसी अनुवादक के ही समझ जायेगा लेकिन ये इंसानो के लिए ये भाषा बहुत कठिन है | 

Assembly Language – इसमें 0 ,1 के बदले कुछ नेमोनिक कोड का इस्तेमाल किया जाता है इस भाषा को binary language का improve version कहा जाता है क्योकि यह भाषा समझने में आसान होती है | इसमें प्रोग्रामिंग करने के लिए इंग्लिश के शब्दो का इस्तेमाल किया जाता है जो कंप्यूटर नहीं समझता है इसलिए , इसे मशीनी भाषा में बदलने के लिए एक अनुवादक की आवश्यकता होती है जिसे Assembler कहा जाता है | 

See also  Web Development क्या है?#
High Level Language

इस भाषा को इंसान आसानी से समझ सकते है तथा कंप्यूटर में मनचाहा प्रोग्राम भी बना सकते है क्योकि भाषा में English word का use किया जाता है जैसे Printf , Scanf , getch ,  clrscr , if , else , switch , int etc. इसमें प्रोग्राम करने के लिए English शब्दो का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन कंप्यूटर तो सिर्फ 0 , 1 की ही भाषा समझता है इसलिए इसे 0 और 1 में बदलने के लिए  Translator या compiler की आवश्यकता होती है | ये Translator या compiler हमारे द्वारा लिखे गए प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदल देता है जिससे कंप्यूटर दिए गए निर्देश के अनुसार कार्य कर सके है |  आज कल हम कोई भी सामान्य प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर बनाने के लिए High Level Language का ही use करते है | 

प्रमुख प्रोग्रामिंग लैंग्वेज व उनके नाम 

नीचे कुछ प्रमुख प्रोग्रामिंग भाषाओ के नाम दिए गए है 

C Language – यह एक high level language है जिसे 1972 में bell labs द्वारा बनाया गया था | इसे UNIX नामक Operating System बनाने के लिए बनाया गया था लेकिन बाद में इसका उपयोग JAVA और C++ जैसे language बनाने में किया गया | इसका उपयोग System Software बनाने लिए किया जाता है जैसे विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को इसी के द्वारा बनाया गया है | 

JAVA – जावा एक High Level Language है जो 1990 में बनाया गया था | इसका उपयोग कई प्रकार के Mobile व Web Application बनाने के लिए किया जाता है | 

इसके अलावा और भी कई प्रकार के लैंग्वेज है जैसे C++ , Python , HTML , CSS , JS , Perl , Ruby , Php etc.

आपको कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्यों सीखना चाहिए?

अब, प्रोग्रामिंग के बारे में इतनी सारी बातें जानने के बाद, उत्तर दिया जाने वाला बड़ा सवाल है – आपको कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्यों सीखना चाहिए? इससे आपको क्या फायदा होगा आइये समझते हैं क्यों आपको प्रोग्रामिंग सीखना चाहिए-

प्रोग्रामिंग करना मजेदार है

प्रोग्रामिंग का उपयोग करके, आप अपना खुद का गेम, अपना खुद ब्लॉग / प्रोफाइल / वेबसाइट पेज, फेसबुक जैसी एक सोशल नेटवर्किंग साइट, गूगल जैसे सर्च इंजन या अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बना सकते हैं! क्या यह मज़ेदार नहीं है? अपनी खुद की गेम बनाने और प्ले स्टोर पर डालने के बाद उसके डाउनलोड होने के बाद आप कितने ज्यादा पैसे कमा सकते हैं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

बहौत सारी कंपनी हैं जो इसी की वजह से चल रही हैं.

आज की प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) कंपनियां जैसे कि Google, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, ऐप्पल, अमेज़ॅन और कई अन्य, कंपनी में जो भी काम किया जाता है वो सब प्रोगरामिंग की मदद से किआ जाता है, और जो इस काम को करते हैं होने प्रोग्रामर कहा जाता है, आप भी अच्छी प्रोगरामिंग या coding सीख कर किसी बड़ी कंपनी में जॉब कर सकते हैं, या अपनी खुद की कंपनी भी बना सकते हैं.

अच्छे स्कोप के साथ-साथ अच्छी कमाई भी होती है.

एक प्रोग्रामर को अच्छी प्रोगरामिंग आती है तो उसके लिए आजकी तारीख में काम की कमी नहीं है, वो किसी कंपनी में या फ्रीलान्स काम करके भी लाखों रुपये कमा सकते हैं, बहौत सारी कंपनी हैं तो अपने प्रोग्रामर को बहौत ज्यादा पैसे देते हैं. आप भी प्रोगरामिंग सीख कर बहौत सारे पैसे कमा सकते हैं.

ऑफलाइन प्रोगरामिंग कैसे सीखें?

अगर आप ऑफलाइन प्रोगरामिंग सीखना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको अपने आस पास कोई अच्छी कोचिंग देखनी होगी, जहाँ से आप प्रोगरामिंग सीख सकते हैं, अगर आपको ज्यादा नॉलेज नहीं है की कौनसी कोचिंग अच्छी है तो आप किसी अपने पहचान वाले की मदद ले सकते हैं, या फिर आप Google में सर्च कर सकते हैं की best programming coaching near me सर्च कर सकते हैं, जिसके बाद आपको आपके पास में जितनी भी कोचिंग क्लास होंगी उनकी जानकारी मिल जाएगी.

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रकार (Type Of Programming Language In Hindi )

Programming Language को कंप्यूटर के समझने की difficulty (सरलता या कठिनाई) के आधार पर दो भागों में बाटा गया है -:

  1.   निम्न-स्तरीय भाषा (Low Level Language )
  2.   उच्च स्तरीय भाषा (High Level Language)

1. निम्न-स्तरीय भाषा (Low Level Language In Hindi )

Low Level Language वो लैंग्वेज है जो मशीन के काफी करीब होता है | मतबल निम्न-स्तरीय भाषा (Low Level Language) कंप्यूटर के समझें के हिसाब से बहुत आसान होता है इस तरह के लैंग्वेज को दो भागों में बाटा गया है -:

  • मशीन लेवल लैंग्वेज (Machine level language)
  • असेंबली लैंग्वेज (Assembly language)

आइये जानते है कि Machine level language Kya Hai? और Assembly language Language Kya Hai?

मशीन लेवल लैंग्वेज क्या है? (What Machine Level Language In Hindi)

हम ह्यूमन लैंग्वेज (Human language) जैसे -हिंदी ,उर्दू का उपयोग कंप्यूटर को इंस्ट्रक्शन देने या ये बताने के लिए नहीं कर सकते कि कंप्यूटर को करना क्या है क्योंकि कंप्यूटर मनुष्यों की भाषा नहीं जनता उसका (कंप्यूटर का) अपना एक भाषा होता है जो कि है मशीन लैंग्वेज या बाइनरी लैंग्वेज (0 और 1 ) |

ऐसे में हमे अगर कंप्यूटर को कोई इंस्ट्रक्शन देना है तो हमको भी मशीन लैंग्वेज (Machine Language) या बाइनरी लैंग्वेज (0 और 1) सीखना पड़ेगा |

मशीन लैंग्वेज 1st जनरेशन कंप्यूटर लैंग्वेज है मशीन लैंग्वेज में हम जो इंस्ट्रक्शन कंप्यूटर को देते है उसमे सिर्फ और सिर्फ 0 और 1 होता है जो सीधे कंप्यूटर या मशीन दयारा Execute होता है क्योकि कंप्यूटर को सिर्फ मशीन भाषा (Machine Language) ही आती है | 

Example-: अगर मुझे 9 +2 कंप्यूटर में लिखना है वो भी मशीन लैंग्वेज की मदद से तो इसके लिए मुझे 9 ,+, 2 को बाइनरी कोड में कन्वर्ट करके लिखना पड़ेगा | जिसका बाइनरी कोड कुछ इस तरह होता – 1001 00101011 0010  

अगर आप  बाइनरी कोड और डेसीमल कोड के बारे में अच्छे से नहीं जानते तो आप इस पोस्ट computer number system को एक बार देख सकते है जिससे आपको इस मशीन लैंग्वेज कोड को समझने में आसानी होगी | 

मशीन स्तर की भाषा कंप्यूटर के समझने के हिसाब से तो आसान होता है पर एक  प्रोग्रामर के नज़रिए से देखे तो बहुत कठिन होता है इसे थोड़ा सरल बनाने के उद्देश्य से असेंबली लैंग्वेज (Assembly language) को डेवलप्ड किया गया |

असेंबली लैंग्वेज क्या है? (What Assembly Language In Hindi)

Assembly language सेकंड जेनरेशन (2nd Generation) कंप्यूटर लैंग्वेज है असेंबली लैंग्वेज में जो set of instructions (निर्देशों का सम्मुचय) दिया जाता है उसमे कुछ English जैसे commends या सिंबॉलिक कोड्स (ADD, PRINT, MOV, SUB etc.) का उपयोग होता है इस तरह के कोड को निमोनिक (Mnemonic) कहते है |

असेंबली लैंग्वेज में कोड या Programs लिखना और समझना प्रोग्रामर के लिए मशीन स्तर की भाषा Machine level language की तुलना में थोड़े आसान हो गया था, मगर कंप्यूटर के लिए थोड़ा कठिन क्योंकि कंप्यूटर को सिर्फ मशीन लैंग्वेज (Machine Language) ही समझ आती है |

ऐसे में हमे Assembly Language को मशीन लैंग्वेज में Translate करना पड़ा | Translate करने के लिए जिस ट्रांसलेटर (Translator) का उपयोग किया गया उसका नाम है असेम्बलर (Assembler) | 

हालांकि असेंबली लैंग्वेज (Assembly language) में प्रोग्राम्स लिखना पहले की तुलना में आसान हो गया था मगर फिर भी प्रोग्रामर्स को कंप्यूटर के हार्डवेयर से रिलेटेड सभी लो लेवल डिटेल्स की अच्छे से जानकारी होना जरूरी था |

असेंबली लैंग्वेज में डाटा जो है कंप्यूटर के रजिस्टर (Register) में स्टोर होता था और प्रत्येक कंप्यूटर में डिफरेंट सेट ऑफ़ रजिस्टर होते थे जिससे असेंबली लैंग्वेज पोर्टेबल नहीं था |

चुकी low level language हार्डवेयर से रिलेटेड था इसलिए Assembly Language के प्रोग्राम्स काफी फ़ास्ट Execute होते थे |

मशीन लेवल लैंग्वेज और असेंबली लैंग्वेज में अंतर (Machine Level Language and Assembly Language In Hindi)

Machine Language

1.Machine Language एक निम्न-स्तरीय प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Low level Programming language) है।

2.Machine Language, 0 और 1 ( बाइनरी प्रारूप ) के रूप में होता है जहाँ, 1 True को दर्शाता है जबकि 0 false को दर्शाता है।

3.मशीन लैंग्वेज को समझना कंप्यूटर के लिए काफी आसान होता है या यूँ कहे मशीन लैंग्वेज केवल कंप्यूटर के लिए होता है |

4.CPU सीधे Machine Language को समझ सकता है। कंपाइलर या असेंबलर की जरूरत नहीं।

5.मशीनी लेवल लैंग्वेज के कोड और इंस्ट्रक्शंस को याद करके रखना बहुत मुश्किल है |

6.मशीन लैंग्वेज में मॉडिफिकेशन पॉसिबल नहीं है इसे किसी खास ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए specialy बनाया जाता है |

7.CDs, DVDs and Blu-ray Discs आदि में मशीन लैंग्वेज का use है |

8.मशीन लैंग्वेज Hardware पर Dependent है।

9.मशीन लैंग्वेज को कंप्यूटर के लिए अलग से ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं होती कंप्यूटर Direct मशीन लैंग्वेज को समझ जाता है |

10.मशीन लैंग्वेज में program फ़ास्ट execute होती  है क्योंकि सभी डेटा पहले से ही बाइनरी रूप में होता हैं।

Assembly Language

1.Assembly Language, हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और मशीन लैंग्वेज के बीच एक Intermediate प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है |

2.Assembly Language, अंग्रेजी syntax (mnemonics) होते है, जिसे इंटरप्रेटर और कंपाइलर द्वारा निम्न-स्तरीय भाषा में परिवर्तित करने के बाद CPU द्वारा समझा जाता है।

3.असेंबली लैंग्वेज को समझना कंप्यूटर के लिए काफी मुश्किल होता है | हम कह सकते है कि असेंबली लैंग्वेज मनुष्यों के लिए होता है |

4.प्रोग्रामर असेंबली लैंग्वेज को समझ सकते हैं, हालाँकि, CPU असेंबली लैंग्वेज को नहीं समझ सकता।

5.असेंबली लैंग्वेज के कोड और इंस्ट्रक्शंस को याद करके रखना मशीन लैंग्वेज की तुलना में थोड़ा आसान है |

6.असेंबली लैंग्वेज में modification करना मशीन लैंग्वेज की तुलना में बहुत ज्यादा कठिन नहीं है |

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7.असेंबली लैंग्वेज का उपयोग इन निम्न एप्लिकेशन में किया जाता है  -: device drivers, low-level embedded systems, और real-time systems आदि | 

8.असेंबली भाषा मशीन पर डिपेंड करता है |

9.असेंबली लैंग्वेज को कंप्यूटर के समझने के लिए अलग से ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं होती है |

10.असेंबली लैंग्वेज मशीन लैंग्वेज की तुलना में थोड़ा स्लो Execute होता है क्योकि इसे पहले मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करना पड़ता है ताकि कंप्यूटर इसे समझ सके और Execute कर सके | 

Machine Language and assembly language in Hindi

मशीन लेवल लैंग्वेज और असेंबली लैंग्वेज के बीच मुख्य अंतर (Key Difference Between Machine Level Language and Assembly Language In Hindi)

  1. Machine Level Language एक Low level Programming language है। जिसे कंप्यूटर के लिए समझना काफी आसान होता है, जबकि Assembly Language, हाई लेवल लैंग्वेज और मशीन लैंग्वेज के बीच एक Intermediate प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है इसलिए Assembly Language को समझना कंप्यूटर के लिए मशीन लैंग्वेज की तुलना में थोड़ा सा मुश्किल होता है | 
  2. मशीन लेवल लैंग्वेज, 0 और 1 के रूप में होता है, जिसे CPU द्वारा तुरंत समझ लिया जाता है यहाँ 1 True को दर्शाता करता है जबकि 0 false को दर्शाता करता है, जबकि Assembly Language में अंग्रेजी syntax (mnemonics) होते है, जिसे इंटरप्रेटर और कंपाइलर द्वारा निम्न-स्तरीय भाषा में परिवर्तित करने के बाद ही CPU द्वारा समझा जाता है।
  3. मशीनी लेवल लैंग्वेज के कोड और इंस्ट्रक्शंस को याद करके रखना बहुत मुश्किल है जबकि असेंबली लैंग्वेज के कोड और इंस्ट्रक्शंस को याद करके रखना मशीन लैंग्वेज की तुलना में थोड़ा आसान है |
  4. Machine Language में मॉडिफिकेशन संभव नहीं है इसे किसी खास ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए specially बनाया जाता है, जबकि असेंबली लैंग्वेज में modification करना मशीन लैंग्वेज की तुलना में ज्यादा कठिन नहीं है |
  5. मशीन लैंग्वेज Hardware पर निर्भर है और असेंबली भाषा मशीन पर निर्भर करता है |
  6. मशीन लैंग्वेज को कंप्यूटर के लिए अलग से ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं होती कंप्यूटर सीधे मशीन लैंग्वेज को समझ जाता है जबकि असेंबली लैंग्वेज को कंप्यूटर के समझने के लिए अलग से ट्रांसलेट करने की जरूरत नहीं होती है
  7. मशीन लैंग्वेज में प्रोग्राम काफी फ़ास्ट execute होती  है क्योंकि सभी डेटा पहले से ही बाइनरी रूप में होता हैं और असेंबली लैंग्वेज, मशीन लैंग्वेज की तुलना में थोड़ा स्लो Execute होता है क्योकि इसे पहले मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करना पड़ता है ताकि कंप्यूटर इसे समझ सके और Execute कर सके | 

दोस्तों यहाँ तक आपको समझ आ गया होगा कि प्रोग्रामिंग क्या है (What is Programming in Hindi) और प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है?? (What is Programming Language in Hindi)

साथ ही निम्न-स्तरीय भाषा क्या है? (What is Low Level Language in Hindi) और मशीन लेवल लैंग्वेज (Machine level language) तथा असेंबली लैंग्वेज (Assembly language ) के बारे में भी जान गए होंगे |

आइये अब जान लेते हैं कि निम्न स्तर की भाषा के क्या लाभ है? (Advantages of Low Level Language In Hindi) और क्या नुकसान है? (Disadvantages of Low Level Language In Hindi)

निम्न स्तर की भाषा के लाभ (Advantages of Low Level Language In Hindi)

  • जो प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर Low Level Language में बनाये जाता है वो बहुत फ़ास्ट और मेमोरी एफसीएनट (Efficient) होता है|
  • प्रोग्रम्म्स प्रोसेसर और मेमोरी का उपयोग बहुत अच्छे तरीका से करता है | 
  • Low Level Language  में डायरेक्ट हार्डवेयर से इंटरेक्शन होता है |

निम्न-स्तरीय भाषा के नुकसान (Disadvantages of Low Level Language In Hindi)

  • प्रोग्रामिंग करने में समय बहुत लगता हैं |
  • प्रोग्रामिंग करना प्रोग्रामर के लिए बहुत कठिन होता है |
  • प्रोग्राम मशीन डिपेंडेंट होते है और पोर्टेबल नहीं होते |
  • इसे विकसित करना, डिबग करना और बनाए रखना मुश्किल है।
  • निम्न स्तर के कार्यक्रम अधिक त्रुटि प्रवण होते हैं।
  • प्रोग्रामर को निम्न स्तर की भाषा में प्रोग्रामिंग के लिए, विशेष मशीन के कंप्यूटर आर्किटेक्चर का अतिरिक्त ज्ञान होना चाहिए।

निम्न-स्तरीय भाषा (low level language) प्रोग्रामर के लिए बहुत कठिन था इसलिए उच्च स्तरीय भाषा (High-level language In Hindi) का विकास हुवा |


2. उच्च स्तरीय भाषा (High-level language In Hindi)

High-level language प्रोग्रामर्स फ्रेंडली और मशीन प्लेटफॉर्म इंडिपैंडेंट हैं जिसकी वजह से ये काफी पोर्टेबल हैं High-level language में जो इंस्ट्रक्शन दिया जाता हैं वो कुछ इंग्लिश जैसा ही हैं जिससे प्रोग्रामर्स को प्रोग्राम या code लिखने में और समझने में बहुत आसानी होती है |

साथ ही High-level language में प्रोग्रामिंग (Programming) करने का एक फायदा ये भी है की प्रोग्रामर को कंप्यूटर के हार्डवेयर (Hardware) से रिलेटेड सभी लो लेवल जानकारी होना जरूरी नहीं | 

मगर High-level language कंप्यूटर के समझने के लिए काफी कठिन था क्योंकि कंप्यूटर को सिर्फ मशीन लैंग्वेज ही समझा आता है |

ऐसे में हमे हाई लेवल लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में Translate करना पड़ा , हाई लेवल लैंग्वेज को Translate करने के लिए Compiler और Interpreter का उपयोग किया जाता है | 

ये कम्पाइलर और Interpreter अलग अलग उच्च स्तरीय भाषा (High-level language) के हिसाब से अलग अलग आते है | कुछ हाई लेवल लैंग्वेज जैसे – FORTRAN, COBOL, BASIC, Pascal, C, C++ , Java etc.

कम्पाइलर ,इंटरप्रेटर और असेम्बलर के बारे में अच्छे से जानने के लिए यहाँ पर 👉 क्लिक करे 

उच्च स्तरीय भाषा के प्रकार (Types of High Level Language In Hindi )

अलग अलग टास्क को करने के लिए बहुत से कंप्यूटर लैंग्वेज (Computer Language) को डेवेलप किया गया है इसमें से कुछ specific purpose के लिए थे तो कुछ जनरल पर्पस (general-purpose) के लिए थे, इनके काम के आधार पर ये निम्न प्रकार के होते है -:

  • Algebraic Formula Type Processing
  • Business Data Processing
  • Object-Oriented Programming Language
  • Visual Programming Language

Algebraic Formula Type Processing

इस टाइप के लैंग्वेज को माथेमेटिक और स्टेटिक (Mathematics and Statistics) तरह के प्रोब्लेम्स को सोल्व करने के लिए बनाया गया है इस तरह के कुछ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है –

  • ALGOL        – Algorithmic Language
  • BASIC         – Beginners All-Purpose Symbolic Instruction Code
  • PL/I             – Programming Language, Version 1
  • FORTRAN  – Formula Translation
  • APL            – A Programming Language

Business Data Processing

इस टाइप के लैंग्वेज को डाटा प्रोसेसिग प्रोसीजर (Processing procedure) और फाइल हैंडलिंग (File Handling) के  प्रोब्लेम्स को सोल्वे करने के लिए बनाया गया है इस तरह के कुछ प्रोग्रामिंग  लैंग्वेज है –

  • Prolog  – Program in Logic
  • LISP     – List Processing

Object-Oriented Programming Language

इस टाइप के लैंग्वेज में कंप्यूटर प्रोग्राम ऑब्जेक्ट (Object) के रूप में डिवाइड होते है इस तरह के कुछ प्रोग्रामिंग  लैंग्वेज है -:

  • Java 
  • C++

Visual Programming Language

इस टाइप के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को developed किया गया विंडो बेस्ड एप्लीकेशन को बनाने के लिए | इस तरह के कुछ कंप्यूटर  लैंग्वेज है –

  • Visual C
  • Visual Java
  • Visual Basic

उच्च स्तरीय भाषा के लाभ (Advantages of High Level Language In Hindi )

  • उच्च स्तरीय भाषा (High-level language) यूजर प्रेंड्ली (User Friendly) होते है| 
  • आसानी से सीखे जा सकते है |
  • आसानी से मेंटेंन किया जा सकता है |
  • High-level language मशीन इंडिपेंडेंट होता है |
  • हाई लेवल लैंग्वेज में एक बार प्रोग्राम लिखने के बाद इसको अलग अलग कंप्यूटर के हिसाब से कम्पाइल और इंटरप्रेट करके उपयोग किया जा सकता है |

उच्च स्तरीय भाषा के नुकसान (Disadvantages of High Level Language In Hindi)

  • High Level Language को मशीन लैंग्वेज में ट्रांसलेट करना पड़ता है जिसमे टाइम लगता है |
  • लौ लेवल लैंग्वेज की तुलना में स्लो होते है| 
  • डायरेक्ट हार्डवेयर से कम्यूनिकेट नहीं कर सकते है| 

हाई लेवल लैंग्वेज और लो लेवल लैंग्वेज में अंतर ( Difference Between High level Language and Low-level language in Hindi)

1.High level language एक प्रोग्रामर फ्रेंडली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।

2.हाई लेवल लैंग्वेज प्रोग्रामर के लिए समझना आसान है |

3.High level language डिबग करने के लिए सरल है।

4.यह तुलनात्मक रूप से maintain रखना जटिल है।

5.यह पोर्टेबल नहीं है।

6.यह मशीन पर निर्भर है।

7.इसे translation के लिए assembler की जरूरत है।

8.प्रोग्रामिंग में अब इसका इस्तेमाल आमतौर पर नहीं किया जाता है।

high level language vs low level language in Hindi

High Level Language And Low Level Language के बीच महत्वपूर्ण अंतर |

  • High level language एक प्रोग्रामर फ्रेंडली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जबकि Low Level Language एक मशीन फ्रेंडली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज प्रोग्रामर के लिए समझना आसान है।  प्रोग्रामर के लिए  Low Level Language को समझना कठिन है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज में debugging करना सरल है जबकि लौ लेवल लैंग्वेज में debugging करना हाई लेवल लैंग्वेज की तुलना में काफी जटिल है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज को maintain रखना आसान है जबकि  Low Level Language को maintain रखना थोड़ा कठिन है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज एक पोर्टेबल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है। Low Level Language पोर्टेबल नहीं है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज को हम किसी भी प्लेटफॉर्म पर चल सकता है। मगर  Low Level Language मशीन पर निर्भर है।
  • हाई लेवल लैंग्वेज को translation के लिए compiler या interpreter की आवश्यकता होती है जबकि Low Level Language को translation के लिए assembler की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष ( Conclusion )

मै उम्मीद करता हू की आप लोग प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है ( Programming Language in Hindi ), प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रकार, Coding क्या है अच्छे से समझ गए होंगे | अगर आप कोई भी Application या Software बनाने चाहते है तो आपको ये आपको अवश्य सीखना चाहिए |

Ummeed hai aapko hamari iss class mein jo bhi bataya gaya h, wo poori tarah se samjh mein aaya hoga…. Yadi haan toh hamari aage aane wali classes ko bhi join kare Aur apna feed…..Dhanyawaad.

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