कृत्रिम बुद्धिमत्ता या Artificial Intelligence क्या है और कैसे काम करता है?#gautam bhaiya done

क्या आप जानते हैं की कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) क्या है (What is Artificial Intelligence in Hindi)? जब से computers का आविष्कार हुआ है तब से इंसानों ने इसका इस्तमाल काफी बढ़ा दिया है. वो इन्हें अपने सारे काम करने में लगा देते हैं जिससे हमें उनपर ज्यादा depend होना पड़ता है.

इससे उनकी dependancy का exponential growth हुआ है. मनुष्यों ने इन मशीनों की capability को काफी हद तक बढ़ा दिया है जैसे की उनकी speed, उनका size और उनकी कार्य करने की क्ष्य्मता जिससे की ये हमारे काम बहुत ही कम समय में कर सकें जिससे की हमारे समय की बचत होगी.

आपने भी शायद ये लक्ष्य किया होगा की आजकल जिसे देखो Artificial Intelligence की बस तारीफ किये जा रहा है. यदि आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तब आपको चिंतित होने की जरुरत नहीं है क्यूंकि आज में आप लोगों को Artificial Intelligence क्या है और ये इतना जरुरी क्यूँ है के बारे में पूरी जानकरी देने जा रहा हूँ. जिससे की आपके मन में उठ रहे सारे सवालों के जवाब इस article के समाप्त होने तक आपको मिल जायेंगे.

एक नया domain अब सामने आया है जिसे लोग Artificial Intelligence के नाम से जानते हैं जो की मूल रूप से Computer Science का ही branch है और जिसका मुख्य काम ये है की ऐसे intelligent machine बनाएं जो की मनुष्य के जैसे ही बुद्धिमान हो और जिसकी अपनी ही decision लेने की क्ष्य्मता हो. इससे ये हमारे काम और भी आसान कर देंगे.

तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की आखिर ये आर्टिफिशल इंटेलिजेंस क्या होता है और हम मनुष्यों के लिए ये इतना जरुरी क्यूँ है.अनुक्रमदिखाएँ

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस क्या है (What is Artificial Intelligence in Hindi)

Artificial Intelligence Kya Hai

AI का full form है Artificial Intelligence या हिंदी में इसका अर्थ है कृत्रिम होशियारी या कृत्रिम दिमाग. ये एक ऐसा simulation है जिससे की मशीनों को इंसानी intelligence दिया जाता है या यूँ कहे तो उनके दिमाग को इतना उन्नत किया जाता है की वो इंसानों के तरह सोच सके और काम कर सके.

ये खासकर computer system में ही किया जाता है. इस प्रक्रिया में मुख्यत तीन processes शामिल है और वो हैं पहला learning (जिसमें मशीनों के दिमाग में information डाला जाता है और उन्हें कुछ rules भी सिखाये जाते हैं जिससे की वो उन rules का पालन करके किसी दिए हुए कार्य को पूरा करे), दूसरा है Resoning (इसके अंतर्गत मशीनों को ये instruct किया जाता है की वो उन बनाये गए rules का पालन करके results के तरफ अग्रसर हो जिससे की उन्हें approximate या definite conclusion हासिल हो) और तीसरा है Self-Correction.

अगर हम AI की particular application की बात करें तो इसमें expert system, speech recognition और machine vision शामिल हैं. AI या Artificial Intelligence को कुछ इस प्रकार से बनाया गया है की वो इंसानों के तरह ही सोच सके, कैसे इंसानी दिमाग किसी भी problem को पहले सीखती है, फिर उसे process करती है, decide करती है की क्या करना उचित होगा और finally उसे कैसे solve करते उसके बारे में सोचती है.

उसी प्रकार की artificial intelligence में भी मशीनों को भी इंसानी दिमाग की सारी विसेश्तायें दी गयी हैं जिससे वो बेहतर काम कर सके.

Artificial Intelligence के बारे में सबसे पहले John McCarthy ने ही दुनिया को बताया. वो एक American Computer Scientist थे, जिन्होंने सबसे पहले इस technology के बारे में सन 1956 में the Dartmouth Conference में बताया.

आज ये एक पेड़ की तरह बहुत ही बड़ा हो गया है और सारी robotics process automation से actual robotics तक सभी चीज़ें इसके अंतर्गत आती हैं. विगत कुछ वर्षों में इसने बहुत publicity gain कर ली है क्यूंकि इसमें big data की technology भी शामिल हो चुकी है और इसकी दिनबदिन बढती हुई speed, size और variety of data business से बहुत से companies इस technology को अपनाना चाहते हैं.

अगर में AI की बात करूँ तो इसकी मदद से raw data में pattern को identify करना काफी आसान हो गया है वहीँ इंसानों द्वारा बहुत गलतियाँ होती हैं, इससे companies को कम समय में अपने data के ऊपर ज्यादा insight प्राप्त होती है.

Artificial Intelligence की Philosophy

जब इन्सान Computer System की असली ताकत की खोज कर रहा था, तब मनुष्य की अधिक जानने की इच्छा ने उसे ये सोचने में बाध्य किया की “क्या Machine भी हमारी तरह सोच सकते हैं ?” और इसी तरह ही Artificial Intelligence की development को शुरुवात हुई जिसका की केवल एक ही उद्देश्य था की एक ऐसी intelligent machine की संरचना की जाये जो की इंसानों की तरह ही बुद्दिमान हो और हमारे ही तरह ही सोच सके.

AI के लक्ष्य

•  Expert Systems बनाना − कुछ ऐसे systems को बनाना जो की intelligent behavior प्रदर्शन कर सके, जो की learn कर सके, demonstrate, explain, और इसके साथ अपने users को advice कर सके.

•  Human Intelligence को Machines में implement करना – ऐसे systems बनाना जो की इंसानों की तरह ही समझ, सोच, सिख, और behave कर सकें.

Artificial Technique क्या है?

अगर हम real world की बात करें तब, ज्ञान की कुछ अजीबोगरीब विसेश्ताएं हैं जैसे की
•  इसकी volume बहुत ही ज्यादा है, या यूँ कहे तो अकल्पनीय है.

•  ये पूरी तरह से well-organized or well-formatted नहीं है.

•  इसके साथ साथ ये निरंतर बदलता रहता है.

अब बात आता है की तब AI Technique क्या है. तो में आपको बता दूँ की Artificial Technique एक ऐसा technique हैं जिससे की हम ज्ञान या knowledge को ऐसे organized way में रखेंगे की जैसे हम इसका इस्तमाल बहुत ही efficiently कर सकते हैं जैस की −

•  ये पढने और समझने योग्य होना चाहिए जो लोग इसे provide करते हैं.

•  ये आसानी से modify करने योग्य होना चाहिए जिससे की इसकी errors को आसानी से सुधारा जा सके.

•  ये बहुत से जगहों में useful होना चाहिए हालाँकि ये incomplete और inaccurate हो.

AI techniques को अगर कोई comlpex programs के साथ equip किया जाये तो उसकी speed of execution को बहुत हद तक बढाया जा सकता है.

Artificial intelligence के types या प्रकार

Artificial Intelligence को बहुत से प्रकारों में divide किया जा सकता है, लेकिन उनमें से जो सबसे मुख्य हैं वो हैं

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1) Weak AI

2) Strong AI

Weak AI: –

इस प्रकार के AI को narrow AI भी कहा जाता है, इन AI system को कुछ इस प्रकार से design किया गया है की ये केवल एक particular task ही करें. उदहारण के तोर पर इसमें Virtual Personal Assistants such as Apple’s Siri weak AI का बहुत बढ़िया उदहारण है.

Strong AI :-

इस प्रकार के artificial intelligence को general artificial intelligence भी कहा जाता है. इस प्रकार के AI System में generalized मनुष्य की बुद्धिमता होती है जिससे की ये समय आने पर अगर इसे कोई difficult सा task दिया जाये तो ये आसानी से उसका solution निकाल सकता है.

Turing Test को mathematician Alan Turing द्वारा सन 1950 में develop किया गया था जिसका इस्तमाल ये जानने के लिए किया गया था की क्या Computers भी इंसानों के तरह सोच सकते हैं की नहीं.

Arend Hintze, जो की एक assistant professor भी हैं of integrative biology and computer science and engineering, Michigan State University में. उन्होंने ही AI को चार हिस्सों में Categorize किया है जो की कुछ इसप्रकार हैं.

• Type 1: Reactive machines.
इसका एक उदहारण है Deep Blue, जो की एक IBM chess program है और जिसने Garry Kasparov को सन 1990s में हराया था. Deep Blue को कुछ इसप्रकार से design किया गया है की ये chess board के pieces को identify कर सकता है और उसके हिसाब से prediction कर सकता है.

लेकिन इसकी अपनी कुछ memory नहीं है जिससे ये अपने past move के बारे में याद नहीं रख सकता जो की ये future में इस्तमाल कर सके. ये possible moves को analyze करता है – इसके खुद की और इसके opponent की – और फिर ये उस हिसाब से सबसे बेहतर strategic move को चुनता है.

Deep Blue और Google’s AlphaGO को narror purposes के लिए design किया गया है और इसे आसानी से दुसरे situations में apply नहीं किया जा सकता.

• Type 2: Limited memory.
इस प्रकार के AI systems अपने past experiences को इस्तमाल कर अपने future decisions को तय करते हैं. कुछ decision-making functions को जो की autonomous vehicles में इस्तमाल किये जाते हैं उन्हें इसी प्रकार से design किया गया है.

ऐसे ही Observations को इस्तमाल कर भविष्य में होने वाले हादसों को कुछ हद तक रोका जा सकता है, जैसे की car को दुसरे lane में change करना. ये Observations permanently store नहीं होते.

• Type 3: Theory of mind.
ये एक psychology term है. ये एक hypothetical concept है. इसमें ये दर्शाता है की दूसरों का अपना beliefs, desires and intentions होता है जो की उनके decisions में impact डालते हैं.

इस प्रकार के AI अभी इस दुनिया में मेह्जुद नहीं हैं.

• Type 4: Self-awareness.
इस category के अंतर्गत AI systems की खुद की self awareness होती है, अपनी एक consciousness होती हैं.

Machines जिनकी self-awareness होती हैं वो अपने current state को समझते हैं और उसी information को इस्तमाल कर ये समझते हैं की दुसरे क्या feel करते हैं. इस प्रकार के AI अभी इस दुनिया में मेह्जुद नहीं हैं.

AI technology के उदहारण

•  Automation एक ऐसी प्रक्रिया जिससे की system और process function को automatic कर दिया जाता है. उदहारण के तोर पे Robotic process automation, को programmed किया जाता है ताकि वो high volume, repeatable tasks को आसानी से कर सकें.

RPA और IT Automation में ये अंतर है की RPA में वो circumstances के हिसाब से adapt होता है वहीँ IT Automation में ऐसा नहीं होता है.

•  Machine Learning एक ऐसा विज्ञान है जिसमें computer बिना programming के काम करता है. Deep Learning Machine Learning का ही एक भाग है जिसमें predictive analytics को automation किया जाता है.

Machine learning के मुख्यत तीन algorithms हैं : supervised learning, जहाँ की data sets को patterns कहा जाता है और जिसे की नए data sets को lebel करने में काम आता है, दूसरा है unsupervised learning, जहाँ की data sets को lebel नहीं किया जाता बल्कि उन्हें sort किया जाता है उनके समानता और असामनता के आधार पर.

तीसरा है reinforcement learning, जहाँ data sets को lebel नहीं किया जाता पर कुछ action और ज्यादा action करने के बाद, AI system को feedback दिया जाता है.

•  Machine vision एक ऐसा विज्ञानं है जिसकी मदद से हम computer को देखने के काबिल कर सकते हैं. Machine Vision में computer visual infomations को camera की मदद से capture करती है और analyze करती है, इसके साथ साथ analog-to-digital conversion और digital signal भी करती है.

इसके इंसानी आँखों के साथ भी तुलना की जाती है, लेकिन machine vision की कोई limitation नहीं है और ये दीवारों के पार भी देख सकते हैं. इसी लिए इनका काफी इस्तमाल medical में भी होता है.

•  Natural language processing (NLP) एक ऐसा process है जिसमें computer program की मदद से किस इंसानी भाषा को मशीन के द्वारा समझा जाता है.

उदहारण के तोर पे आप SPAM detection को ही ले सकते हैं जिसमे computer की program ही ये decide कर लेता है की कोन सी text original emain है और कोन सी Spam email है. NLP के कामों में मुख्यत text translation, sentiment analysis and speech recognition आता है.

•  Pattern recognition एक ऐसा branch है machine learning का जो की data में patterns को identify करता है और जिसका इस्तमाल बाद में data analysis में होता है

•  Robotics एक ऐसा field है जिसमें की Robots की design और manufacturing में ज्यादा focus किया जाता है. ऐसे काम जो की हम इंसानों के लिए बहुत ही मुस्किल हैं वहां हम robots को इस्तमाल में लाते हैं.

क्यूंकि वो कठिन से कठिन काम बड़ी आसानी से कर लेते हैं और वो भी बिना किसी गलती के. उदाहंरण के तोर में हम उनका इस्तमाल Car Production के Assembly line में करते हैं.

AI के Applications

• AI in healthcare.
AI का सबसे बड़ा इस्तमाल Healthcare industry में होता है. यहाँ सबसे बड़ा challenge ये है की कैसे हम patients का बेहतर इलाज कर सकें और वो भी कम से कम लागत में. इसीलिए अब companies AI का इस्तमाल hospitals में कर रही है जिससे की बेहतर और जल्दी मरीजों का इलाज सुचारू रूप से हो सके.

ऐसे ही एक बहुत ही famous healthcare technology है और जिसका नाम है IBM Watson. इसके साथ साथ अब common बीमारियों के लिए Health assistants भी आ चुके हैं जिसकी मदद से अब आम लोग अपने बिमार्रियों का इलाज करवा सकते हैं.इन सभी मशीनों के इस्तमाल से अब Healthcare industry में एक बहुत ही बड़ी क्रांति आने वाली है.

• AI in business.
Robotic process automation की मदद से अब highly repetitive tasks को अब मशीनों के द्वारा किया जा रहा है. Machine learning algorithms को अब analytics and CRM platforms के साथ integrate किया जा रहा है जिससे की ये पता चल सके की कैसे companies अपने customers को बेहतर मदद कर सके.

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Chatbots को websites के सकत incorporate किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द customers को service दी जा सके.

• AI in education.
AI की मदद से अब automate grading किया जा सकता है जिससे की educators को ज्यादा time मिल सके बच्चों को पढ़ने में. AI की मदद से कोई भी छात्र को अच्छी तरह से inspect किया जा सकता है, क्या उसकी जरुरत है, किन किन subjects में वो wealk हैं इत्यदि ताकि उस छात्र का सही तरीके से मदद की जा सके.

आजकल AI Tutors की मदद से Students घर बैठे ही सभी चीज़ों का हल ढूंड ले रहे हैं. इससे उनकी पढ़ने में interest भी काफी बढ़ रही है.

• AI in finance.
AI की मदद से financial institutions को काफी लाभ मिल रहा है. क्यूंकि companies को पहले data anylasis में पहले खूब पैसे और समय invest करना पड़ता था पर अब ऐसा नहीं होता अब तो AI ही सब कुछ बहुत ही कम समय में कर देती है.

• AI in law.
पहले ये documents की processing बहुत ही चिंता पैदा करने वाली काम थी पर अब AI के मदद से अब ये documents की processing बड़ी आसानी से कर दी जाती है इससे काम बड़े ही efficient तरीके से चलता है.

• AI in manufacturing.
AI का इस्तमाल Manufacturing Industry में भी खूब जोरों से है. पहले जिस काम को करने के लिए सेकड़ों लोग लगते थे वहीँ आज एक मशीन के मदद से वही काम बहुत जल्दी और बेहतर किया जा पा रहा है.

Artificial Intelligence और हमारा भविष्य

दिनबदिन Artificial Intelligence का इस्तमाल बढ़ते ही जा रहा है. हम मनुष्य धीरे धीरे ऐसे मशीनों के ज्यादा आदि बनते जा रहे हैं. हम हमारी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश में Artificial Intelligence को और भी ज्यादा शक्तिशाली और ज्यादा advance कर रहे हैं ताकि ये हमारे कठिन से कठिन काम कर सके.

ऐसा होने से हमारे जाने अनजाने में ये मशीन और भी ज्यादा ताकतवर बन जा रहे हैं. और इनमें सोचने की शक्ति भी धीरे धीरे बढ़ रही है जिससे ये किसी भी परिस्तिथि में खुद को ढाल सकते हैं और ये हमारे लिए अच्छी बात नहीं है.

वो दिन दूर नहीं जब ये हमारे आदेश का पालन भी न करें और अपने मन मुताबक ही काम करें. ऐसे में मनुष्य समाज को काफी नुकशान उठाना पड़ सकता है. ये हमारे सभी industries में अपना जड़ पहले से ही गाड़ चुके हैं और हम उनके बहुत आदि बन चुके हैं जिससे उनके बिना हमारा काम हमें करने में भी तकलीफ हो रही है.

सुनने में भले ही ये बात थोडा अटपटा लगे लेकिन ये 100% सही है. मेरा मानना ये है की भले ही हम Artificial Intelligence का इस्तमाल अपने जीवन में अच्छाई के लिए करें लेकिन हमें ये बात ध्यान में रखना बहुत ही जरुरी है की कुछ चीज़ें जो की Control के ऊपर है उनकी चाबी हमें हमारे पास ही रखनी चाहिए. ताकि समय आने पर हम उसका सही इस्तमाल कर सकें.

आज आपने क्या सीखा

मुझे पूर्ण आशा है की मैंने आप लोगों को Artificial Intelligence क्या है के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (What is Artificial Intelligence in Hindi) के बारे में समझ आ गया होगा.

मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Share करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

मेरा हमेशा से यही कोशिश रहा है की मैं हमेशा अपने readers या पाठकों का हर तरफ से हेल्प करूँ, यदि आप लोगों को किसी भी तरह की कोई भी doubt है तो आप मुझे बेझिजक पूछ सकते हैं. मैं जरुर उन Doubts का हल निकलने की कोशिश करूँगा.

विशेष/इन-डेप्थ: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) और मशीन लर्निंग (M.L.)

संदर्भ एवं पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न कारणों और मुद्दों को लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता बराबर चर्चा में बनी हुई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की एक ऐसी शाखा है, जिसका काम बुद्धिमान मशीन बनाना है। हाल ही में सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग और गूगल के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि दोनों भारत की उदीयमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelliegence-AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning-ML) के पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई पहलों पर मिलकर एक साथ काम करेंगे, जिससे देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पारिस्थितिक तंत्र निर्मित करने में मदद मिलेगी। नीति आयोग को एआई जैसी प्रौद्योगिकियाँ विकसित करने और अनुसंधान के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस जिम्मेदारी पर नीति आयोग राष्ट्रीय डाटा और एनालिटिक्स पोर्टल के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर राष्ट्रीय कार्य नीति विकसित कर रहा है, ताकि व्यापक रूप से इसका उपयोग किया जा सके।

  • विदित हो कि गूगल की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी डीपमाइंड, ब्रिटिश नेशनल हेल्थ सर्विस के साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। 

सामान्य तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को समानार्थी समझा जाता है, लेकिन ऐसा है नहीं। आगे इन दोनों के बीच अंतर को स्पष्ट किया गया है, ताकि भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। 

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस?
सरलतम शब्दों में कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है एक मशीन में सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कंप्यूटर साइंस का सबसे उन्नत रूप माना जाता है और इसमें एक ऐसा दिमाग बनाया जाता है, जिसमें कंप्यूटर सोच सके…कंप्यूटर का ऐसा दिमाग, जो इंसानों की तरह सोच सके। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रकार

  • पूर्णतः प्रतिक्रियात्मक (Purely Reactive)
  • सीमित स्मृति (Limited Memory)
  • मस्तिष्क सिद्धांत (Brain Theory)
  • आत्म-चेतन (Self Conscious)
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है– बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक जॉन मैकार्थी के अनुसार यह बुद्धिमान मशीनों, विशेष रूप से बुद्धिमान कंप्यूटर प्रोग्राम को बनाने का विज्ञान और अभियांत्रिकी है अर्थात् यह मशीनों द्वारा प्रदर्शित की गई इंटेलिजेंस है। 
  • इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास किया जाता है, जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट या फिर मनुष्य की तरह इंटेलिजेंस तरीके से सोचने वाला सॉफ़्टवेयर बनाने का एक तरीका है। 
  • यह इसके बारे में अध्ययन करता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है और समस्या को हल करते समय कैसे सीखता है, कैसे निर्णय लेता है और कैसे काम करता है।
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हॉलीवुड में जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार वार, आई रोबोट, टर्मिनेटर, ब्लेड रनर आदि जैसी फिल्में बन चुकी हैं, उनसे आपको यह पता चल सकता है कि आखिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है क्या बला! भारत में भी प्रख्यात अभिनेता रजनीकांत की फिल्म ‘रोबोट’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को देखा-समझा जा सकता है। वैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला कंप्यूटर सिस्टम 1997 में शतरंज के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शामिल रूस के गैरी कास्पोरोव को हरा चुका है।(टीम दृष्टि इनपुट)

ऐसे हुई थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का आरंभ 1950 के दशक में ही हो गया था, लेकिन इसकी महत्ता को 1970 के दशक में पहचान मिली। 
  • जापान ने सबसे पहले इस ओर पहल की और 1981 में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। 
  • इसमें सुपर-कंप्यूटर के विकास के लिये 10-वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी।
  • इसके बाद अन्य देशों ने भी इस ओर ध्यान दिया। ब्रिटेन ने इसके लिये ‘एल्वी’ नाम का एक प्रोजेक्ट बनाया। 
  • यूरोपीय संघ के देशों ने भी ‘एस्प्रिट’ नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की थी। 
  • इसके बाद 1983 में कुछ निजी संस्थाओं ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लागू होने वाली उन्नत तकनीकों, जैसे-Very Large Scale Integrated सर्किट का विकास करने के लिये एक संघ ‘माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी’की स्थापना की।

कहाँ-कहाँ हो रहा उपयोग?
वर्तमान दौर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर किये जा रहे प्रयोगों का दौर कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।  

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रमुख अनुप्रयोग

  • कंप्यूटर गेम (Computer Gaming) 
  • प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (Natural Language Processing) 
  • प्रवीण प्रणाली (Expert System)
  • दृष्टि प्रणाली (Vision System) 
  • वाक् पहचान (Speech Recognition)
  • बुद्धिमान रोबोट (Intelligent Robot)

इसके अलावा, किसी बेहद जटिल सिस्टम को चलाने…नई दवाएं तैयार करने…नए केमिकल तलाशने…खनन उद्योग से लेकर अंतरिक्ष…शेयर बाज़ार से लेकर बीमा कंपनियां…मानव जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है, जिसमें आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दखल न हो। 

इसे इस उदहारण से समझने का प्रयास करते हैं…

  • आज विश्वभर में हवाई जहाज़ों की आवाजाही पूर्णतः कंप्यूटर पर निर्भर है। कौन-सा हवाई जहाज़ कब, किस रास्ते से गुज़रेगा…कहां सामान पहुंचाएगा…यह सब मशीनें तय करके निर्देश देती हैं। यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

तात्पर्य यह कि जिस काम को करने में मनुष्य को समय अधिक लगता है या जो काम जटिल तथा दुष्कर है, वह इन मशीनी दिमाग़ों की मदद से चुटकियों में निपटाया जा सकता है। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 7-सूत्री रणनीति
इससे पहले पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्र सरकार ने 7-सूत्री रणनीति तैयार की थी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने के लिये भारत की सामरिक योजना का आधार तैयार करेगी। इनमें प्रमुख हैं: 
मानव मशीन की बातचीत के लिये विकासशील विधियाँ बनाना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और R&D के साथ एक सक्षम कार्यबल का निर्माण करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, कानूनी और सामाजिक निहितार्थों को समझना तथा उन पर काम करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को मानक मानकर और बेंचमार्क के माध्यम से मापन का मूल्यांकन करना।(टीम दृष्टि इनपुट)

सावधानी भी ज़रूरी है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हमारे रहने और कार्य करने के तरीकों में व्यापक बदलाव आएगा। रोबोटिक्स और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों से तो उत्पादन और निर्माण के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के मुताबिक अकेले अमेरिका में अगले दो दशकों में डेढ़ लाख रोज़गार खत्म हो जाएंगे। 

संभवतया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में रोज़गार जनित चुनौतियों से हम निपट लें, लेकिन सबसे बड़े खतरे को टालना मुश्किल होगा। अतः स्पष्ट है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त मशीनों से जितने फायदे हैं, उतने ही खतरे भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोचने-समझने वाले रोबोट अगर किसी कारण या परिस्थिति में मनुष्य को अपना दुश्मन मानने लगें तो मानवता के लिये खतरा पैदा हो सकता है। सभी मशीनें और हथियार बगावत कर सकते हैं। ऐसी स्थिति की कल्पना हॉलीवुड की ‘टर्मिनेटर’ जैसी फिल्म में की गई है।

बन रहे हैं इंटेलिजेंट रोबोट
इस समय का नवीनतम आविष्कार कृत्रिम बुद्धिमत्ता मशीनों की बुद्धि को दर्शाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से रोबोट को इफेक्टिव और इंटेलिजेंट बनाया जाता है। इस प्रकार के रोबोट विदेशों में एवं देश की कई बड़ी कंपनियों में अपनी जगह बना चुके है और ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें करने में श्रमिकों और तकनीकी कर्मचारियों को बेहद कठिनाई का अनुभव होता है।

सऊदी अरब का इंटेलिजेंट रोबोट सोफियासोफिया नामक रोबोट को हैनसन रोबोटिक्स के संस्थापक डेविड हैनसन ने 2016 में बनाया था। 25 अक्टूबर 2017 में सऊदी अरब ने इसे अपनी पूर्ण नागरिकता दी और किसी भी देश की नागरिकता हासिल करने वाली वह दुनिया की पहली रोबोट है।सोफिया के हाव-भाव बिल्कुल मनुष्यों जैसे हैं और वह दूसरे के चेहरे के हावों-भावों को भी पहचान सकती है। सोफिया अपनी इंटेलिजेंस से किसी से भी बातचीत करने के अलावा, मनुष्यों की तरह सभी काम कर सकती है और अपने खुद के विचार रखती है। सोफिया को सऊदी अरब के ऐसे सभी अधिकार मिले हैं, जो वहाँ की सरकार अपने नागरिकों को प्रदान करती है। जब कभी सोफिया गलत होगी तो सऊदी अरब के कानून के अनुसार उस पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है। अगर कोई अन्य व्यक्ति या नागरिक सोफिया के साथ कुछ गलत करता है तो सोफिया भी सऊदी अरब के कानून के अनुसार मुकदमा दायर कर सकती है। भारत आ चुकी है सोफिया: मुंबई में जब एशिया का सबसे बड़ा टेक फेस्ट-2017 आयोजित किया गया था तब इसके टेलीफेस्ट में रोबोट सोफिया भी आई थी। सोफिया ने इस कार्यक्रम में भारतीय अंदाज़ को अपनाया और इस प्रोगाम में भारतीय वेशभूषा में सफेद और संतरी रंग की साड़ी पहनी हुई थी। सोफिया ने ‘नमस्ते इंडिया, मैं सोफिया’ कहकर वहाँ मौजूद लोगों का अभिवादन किया। टेक फेस्ट-2017 में तीन हजार लोगों में इस बात को लेकर उत्सुकता थी कि आखिर सोफिया किस तरह बात करती है और सवालों के जवाब कैसे देती है। सोफिया ने सभी सवालों के जवाब बड़ी ही चतुराई और प्रभावी तरीके से दिये। सोफिया ने वहाँ मौजूद लोगों से हिंदी में बात की।(टीम दृष्टि इनपुट)

मशीन लर्निंग (Machine Learning) क्या है?
जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसे कंप्यूटर प्रोग्रामों के लिये इस्तेमाल किया जाता है, जो उन समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है, जिसे मनुष्य आसानी से कर सकते हैं, जैसे किसी फ़ोटो को देखकर उसके बारे में बताना। उसी प्रकार एक अन्य काम जो इंसान आसानी से कर लेते हैं, वह है उदाहरणों से सीखना…और मशीन लर्निंग प्रोग्राम भी यही करने की कोशिश करते हैं अर्थात् कंप्यूटरों को उदाहरणों से सीखने के बारे में बताना। इसके लिये बहुत सारे अल्गोरिद्म आदि जुटाने पड़ते हैं, ताकि कंप्यूटर बेहतर अनुमान लगाना सीख सकें। लेकिन अब कम अल्गोरिद्म से मशीनों को तेज़ी से सिखाने के लिये मशीनों को ज़्यादा कॉमन सेंस देने के प्रयास किये जा रहे हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘रेग्यूलराइज़ेशन’ कहा जाता है। 

इसे एक उदहारण से और अधिक स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं…

  • हॉलीवुड की फिल्म ‘माइनॉरिटी रिपोर्ट’ में टॉम क्रूज अभिनीत पुलिसमैन तीन पारलौकिक सी प्रतीत होने वाली शक्तियों से मिली सूचना के आधार पर भावी अपराधियों को कानून तोड़ने के पहले ही पकड़ लेता है। 

वास्तव में ऐसा पूर्वानुमान लगाना अधिक कठिन है, लेकिन कंप्यूटर की पूर्वानुमान लगाने की बढ़ती क्षमता के कारण अब ऐसी संभावना कल्पना जगत तक ही सीमित नहीं प्रतीत होती। मशीन लर्निंग प्रोग्राम उल्लेखनीय रूप से सटीक पूर्वानुमान लगा सकता है। यह डेटा की भारी-भरकम मात्रा में पैटर्न तलाशने के सिद्धांत पर काम करता है। 

इसे इस उदाहरण से स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं…

  • किसी रेस्तराँ में साफ-सफाई को ही लीजिये। यह मशीन लर्निंग प्रोग्राम पता करता है कि नज़र में न आने वाले कौन से कारकों के मिलने से समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन यदि एक बार मशीन को प्रशिक्षित कर दिया जाए तो वह रेस्तराँ के गंदे होने के जोखिम का आकलन कर सकेगा। 
Learn with Google AI
तकनीक की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आजकल चर्चा में बने हुए हैं। इसीलिये गूगल यह प्रयास कर रहा है कि ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के बारे में लोगों के पास अधिकतम जानकारी हो। इसी के मद्देनज़र गूगल ने Learn with Google AI नामक वेबसाइट शुरू की है, ताकि लोगों को यह समझ में आ सके कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक कैसे काम करती है और मशीन लर्निंग का सिद्धांत क्या है। गूगल ने इसके लिये विशेषज्ञों द्वारा तैयार मशीन लर्निंग क्रैश कोर्स शुरू किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का विकास मानव के विभिन्न दृष्टिकोणों और ज़रूरतों की विविधता को दर्शाता है। Google AI सभी को यह जानकारी निःशुल्क दे रहा है और यह कोर्स उन सभी के लिये है, जो मशीन लर्निंग के बारे में जानना चाहते हैं। Learn with Google AI में ऑनलाइन कोर्स की सुविधा भी है। इसे आप गूगल के मशीन लर्निंग एक्सपर्ट के फीचर वीडियो और दृश्य चित्रण के जरिए जानकारी हासिल कर सकते हैं। इस कोर्स की अवधि 15 घंटे की है, जिसमें गूगल के रिसर्चर लेक्चर देंगे। इस कोर्स को गूगल की इंजीनियरिंग एजुकेशन टीम ने तैयार किया है।(टीम दृष्टि इनपुट)

निष्कर्ष: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संकल्पना बहुत पुरानी है। ग्रीक मिथकों में ‘मैकेनिकल मैन’ की अवधारणा से संबंधित कहानियाँ मिलती हैं अर्थात् एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे किसी व्यवहार की नकल करता है। प्रारंभिक यूरोपीय कंप्यूटरों को ‘लॉजिकल मशीन’ की तरह डिजाइन किया गया था यानी उनमें बेसिक गणित, मेमोरी जैसी क्षमताएँ विकसित कर इनका मैकेनिकल मस्तिष्क के रूप में इस्तेमाल किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे तकनीक उन्नत होती गई और कैलकुलेशंस जटिल होते गए, उसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संकल्पना भी बदलती गई। इसके तहत इनको मानव व्यवहार की तरह विकास करने की कोशिश की गई, ताकि ये अधिकाधिक इस तरह से इंसानी कामों को करने में सक्षम हो सकें, जिस तरह से आमतौर पर हम सभी करते हैं। 

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का कहना है कि मानवता के फायदे के लिये हमने आग और बिजली का इस्तेमाल तो करना सीख लिया, पर इसके बुरे पहलुओं से उबरना जरूरी है। इसी प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी ऐसी ही तकनीक है और इसका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में या जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में भी किया जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का निर्माण हमारी सभ्यता के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से है। लेकिन सच यह भी है कि यदि इसके जोखिम से बचने का तरीका नहीं ढूँढा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि तमाम लाभों के बावजूद आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस के अपने खतरे हैं। कुल मिलाकर एक शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उदय हमारे लिये फायदेमंद भी हो सकता है और नुकसानदेह भी। फिलहाल हम नहीं जानते कि इसका स्वरूप आगे क्या होगा, इसीलिये इस संदर्भ में और ज़्यादा शोध किये जाने की ज़रूरत है

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